नेपाल की भीषण आपदा के बाद बोधगया पहुंचे पर्यटकों में डर, बोले—भगवान बुद्ध से प्रार्थना है, फिर कभी न आए ऐसी तबाही
नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली बोधगया पहुंचे नेपाली पर्यटकों में अपने देश और वहां रह रहे परिवारों को लेकर गहरी चिंता बनी हुई है। बोधगया घूमने पहुंचे पर्यटकों ने नेपाल में हुई तबाही को बेहद दर्दनाक बताते हुए कहा कि उनके मन में अभी भी डर बना हुआ है कि पहाड़ी क्षेत्रों में कब क्या हो जाए, कोई नहीं कह सकता है। पर्यटकों ने भगवान बुद्ध से नेपाल की सुख-शांति और लोगों की सुरक्षा के लिए प्रार्थना की।
नेपाल के विराटनगर से बोधगया पहुंचे पर्यटक शिव नारायण ने बुधवार को बताया कि 26 अगस्त की सुबह नेपाल के कई इलाकों में अचानक आई तेज बाढ़ ने भारी तबाही मचाई।बताया कि उस समय अधिकांश लोग अपने घरों में थे, कुछ लोग भोजन कर रहे थे तो कई लोग कार्यालय जाने की तैयारी में थे। अचानक आई बाढ़ से भारी जान-माल की क्षति हुई। आपदा का मंजर बेहद भयावह था और इसे देखकर हर कोई स्तब्ध रह गया।
नेपाली पर्यटक ने बताया कि बाढ़ ने कई इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि उनके परिवार का बोधगया आने का कार्यक्रम आपदा से पहले ही तय था, इसलिए वे लोग भगवान बुद्ध के दर्शन के लिए यहां पहुंचे हैं। लेकिन नेपाल में हुई तबाही के बाद भी उनके मन में लगातार भय बना हुआ है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और प्राकृतिक परिस्थितियों को लेकर लोगों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना है।
पर्यटक ने भारत द्वारा नेपाल को दी जा रही सहायता का भी जिक्र करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में मानवीय मदद बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि नेपाल सरकार भी आपदा से निपटने के लिए सहयोग का स्वागत कर रही है।

महिला पर्यटक ने नेपाल में हुई घटना को बेहद दुखद बताया। उन्होंने कहा कि नेपाल के लोगों की सुरक्षा और आपदा से राहत के लिए वे भगवान बुद्ध से प्रार्थना कर रही हैं। महिला पर्यटक ने आशंका जताई कि प्राकृतिक परिस्थितियों को देखते हुए लोगों के बीच आगे भी बाढ़ का डर बना हुआ है।
बोधगया की सड़कों और पर्यटन स्थलों पर घूमते नेपाली पर्यटक भले ही भगवान बुद्ध के दर्शन के लिए पहुंचे हैं, लेकिन उनके चेहरों पर अपने देश में आई आपदा की चिंता साफ दिखाई दे रही है। सभी ने एक स्वर में प्रार्थना की कि नेपाल को जल्द इस संकट से राहत मिले और भविष्य में ऐसी विनाशकारी आपदा दोबारा न आए।

