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गया में मंदिर-मठों की जमीन होगी पूरी तरह सुरक्षित, अवैध कब्जा और फर्जी जमाबंदी पर होगी सख्त कार्रवाई: डीएम

गया जिले के मंदिरों और मठों की भूमि की सुरक्षा और विधिवत अभिलेखीकरण को लेकर जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर की अध्यक्षता में शुक्रवार को समाहरणालय सभागार में जिले के विभिन्न मंदिरों एवं मठों के महंतों, पुजारियों और संबंधित अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य विशेष सर्वेक्षण के दौरान मंदिर एवं मठों की सभी भूमि का सही पंजीकरण सुनिश्चित करना तथा अतिक्रमण और अवैध जमाबंदी के मामलों में प्रभावी कार्रवाई करना था।

बैठक में डीएम ने कहा कि मंदिर एवं मठों की भूमि धार्मिक और सार्वजनिक संपत्ति है, इसलिए उसका विधिवत रिकॉर्ड में दर्ज होना जरूरी है। उन्होंने सभी महंतों और पुजारियों से अपने संस्थानों से संबंधित सभी उपलब्ध अभिलेख, खाता, खेसरा, थाना, मौजा एवं अन्य भूमि विवरण शीघ्र जिला बंदोबस्त कार्यालय में जमा कराने की अपील की, ताकि विशेष सर्वेक्षण में किसी प्रकार की त्रुटि न हो।

जिला पदाधिकारी ने कहा कि कई स्थानों से मंदिर और मठों की जमीन पर अवैध कब्जे तथा निजी व्यक्तियों के नाम पर जमाबंदी की शिकायतें मिली हैं। ऐसे मामलों की विधिक समीक्षा कर अपर समाहर्ता (राजस्व) के न्यायालय में वाद दायर किया जाएगा और नियमानुसार अवैध जमाबंदी रद्द कराने की कार्रवाई होगी। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर एवं मठों की सभी भूमि का बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड में विधिवत पंजीकरण सुनिश्चित कराया जाएगा।
बैठक में जिला बंदोबस्त पदाधिकारी ने जानकारी दी कि पूर्ववर्ती सर्वे में मंदिर या मठ के नाम दर्ज भूमि को वर्तमान विशेष सर्वेक्षण में भी उसी नाम से दर्ज किया जाएगा। यदि किसी भूमि को लेकर विवाद लंबित है तो संबंधित मंदिर या मठ को नोटिस देकर उसका पक्ष सुना जाएगा। बैठक में राजस्व विभाग के अधिकारी, जिला बंदोबस्त कार्यालय के पदाधिकारी तथा जिले के विभिन्न मंदिरों एवं मठों के महंत और पुजारी उपस्थित रहे।

बोधगया का जीवक क्लिनिक बना गरीबों के लिए उम्मीद की किरण, सैकड़ों मरीजों का मुफ्त इलाज और दवा वितरण

बोधगया के कटोरवा रोड स्थित जीवक क्लिनिक जरूरतमंद, गरीब और असहाय लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण साबित हो रहा है। यहां प्रतिदिन दूर-दराज के गांवों से आने वाले मरीजों को नि:शुल्क चिकित्सा और दवाइयों की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। शुक्रवार को भी क्लिनिक में बाराचट्टी, डोभी, मोहनपुर और बोधगया प्रखंड के सैकड़ों मरीज इलाज कराने पहुंचे। चिकित्सकों ने सभी मरीजों की जांच कर उन्हें मुफ्त दवाइयां उपलब्ध कराईं।

जीवक क्लिनिक के चेयरमैन भंते डॉ. दीनानंद ने बताया कि जीवक क्लिनिक का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना है, ताकि इलाज के अभाव में किसी भी मरीज को परेशानी का सामना न करना पड़े। मरीजों को जांच के बाद आवश्यक दवाइयां भी बिना किसी शुल्क के दी जाती हैं। साथ ही आपातकालीन स्थिति के लिए 24 घंटे एंबुलेंस सेवा भी संचालित है।

भंते डॉ. दीनानंद ने बताया कि क्लिनिक का नाम बौद्धकालीन महान आयुर्वेदाचार्य एवं शल्य चिकित्सक आचार्य जीवक के नाम पर रखा गया है। बौद्ध ग्रंथों में उनकी चिकित्सा पद्धति का विस्तृत वर्णन मिलता है। उन्होंने मगध सम्राट बिंबिसार की अनुमति से भगवान बुद्ध तथा अवंति नरेश चंद्रप्रयोत का भी उपचार किया था। आचार्य जीवक कभी किसी मरीज से शुल्क नहीं लेते थे। उसी सेवा और मानवता की भावना को आगे बढ़ाते हुए जीवक क्लिनिक में गरीबों का नि:शुल्क इलाज किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि जीवक क्लिनिक आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यहां मिलने वाली मुफ्त चिकित्सा, दवा और एंबुलेंस सुविधा से सैकड़ों परिवारों को बड़ी राहत मिल रही है।

“जिस बोधि वृक्ष के नीचे मिला था ज्ञान, उसकी सुरक्षा में जुटे FRI के वैज्ञानिक”

विश्व धरोहर महाबोधि महाविहार मंदिर परिसर स्थित पवित्र बोधि वृक्ष की सुरक्षा और दीर्घकालिक संरक्षण के लिए बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति (BTMC) ने गुरुवार को महत्वपूर्ण पहल की। बरसात के मौसम से पहले देहरादून के वन अनुसंधान संस्थान (FRI) के वैज्ञानिकों की देखरेख में पवित्र बोधि वृक्ष और उसके समीप स्थित पेड़ पर पर्यावरण-अनुकूल कीट नियंत्रण (इको-फ्रेंडली) स्प्रे का छिड़काव किया गया।

नियमित वैज्ञानिक निरीक्षण के दौरान एफआरआई के वैज्ञानिक शैलेश पांडे और संतान भरथावल ने बोधि वृक्ष पर मिलीबग का हल्का संक्रमण पाया। जिसके संक्रमण के कारण कुछ पत्तियां पीली पड़ने लगी थीं। उन्होंने बताया कि यह समस्या मॉनसून के दौरान बढ़ सकती है, इसलिए समय रहते पर्यावरण-अनुकूल स्प्रे का उपयोग कर संक्रमण को फैलने से रोकने का निर्णय लिया गया। एहतियात के तौर पर पास के पेड़ पर भी स्प्रे किया गया, ताकि कीटों का प्रसार न हो।
यह अभियान एफआरआई के वैज्ञानिकों की निगरानी में चलाया गया। इस दौरान बीटीएमसी की सचिव डॉ. महाश्वेता महारथी, सदस्य डॉ. अरविंद कुमार सिंह, किरण लामा, महाबोधि महाविहार मंदिर के मुख्य भिक्षु भिक्खु चलिंदा, वरिष्ठ भिक्षु डॉ. मनोज, निवासी भिक्षु निमा लामा, मंदिर पर्यवेक्षक शिव शंकर सिंह सहित समिति के अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
बीटीएमसी ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया केवल एक बचावकारी और वैज्ञानिक उपाय है। इसका उद्देश्य मॉनसून के दौरान कीटों के संक्रमण को रोकते हुए भगवान बुद्ध से जुड़े इस ऐतिहासिक एवं पवित्र बोधि वृक्ष की जीवन-शक्ति, हरियाली और दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित करना है। वृक्ष का नियमित वैज्ञानिक परीक्षण आगे भी जारी रहेगा, ताकि इसकी सुरक्षा और देखभाल सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ की जा सके।

पितृपक्ष मेले से पहले प्रशासन का बड़ा एक्शन प्लान, 21 कोषांग गठित; जानिए क्या-क्या होगा..?

पितृपक्ष मेला-2026 को सुरक्षित, स्वच्छ और श्रद्धालु-अनुकूल बनाने के लिए गया जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले मेले के सफल संचालन को लेकर 21 कोषांगों का गठन किया गया है। प्रत्येक कोषांग में वरीय नोडल पदाधिकारी, नोडल पदाधिकारी और सदस्यों की नियुक्ति कर समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया गया है।
जिला परिषद सभागार में आयोजित पहली समीक्षा बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने की। बैठक में समाजसेवियों, पंडा-पुरोहितों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों से सुझाव लिए गए। डीएम ने कहा कि पिछले वर्ष की तरह इस बार भी मेले को और बेहतर बनाया जाएगा। उन्होंने जिलेवासियों से भी सुझाव आमंत्रित करते हुए ppmhasangam@gmail.com पर अपने सुझाव भेजने की अपील की।

प्रशासन ने आवास, स्वच्छता, पेयजल, स्वास्थ्य, बिजली, सड़क, यातायात, सुरक्षा, सूचना प्रबंधन और आपदा प्रबंधन पर विशेष जोर दिया है। होटल, धर्मशाला, विद्यालयों सहित अन्य भवनों में आवास की व्यवस्था की जाएगी, वहीं जरूरत पड़ने पर टेंट सिटी भी विकसित होगी। हर 200 से 500 मीटर पर पेयजल, पर्याप्त शौचालय और नियमित सफाई सुनिश्चित की जाएगी।

विष्णुपद मंदिर और प्रमुख घाटों पर 24 घंटे स्वास्थ्य शिविर, एम्बुलेंस और चिकित्सकों की तैनाती रहेगी। पूरे मेला क्षेत्र में सीसीटीवी निगरानी, अस्थायी पुलिस शिविर और व्यापक ट्रैफिक प्लान लागू होगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए वेबसाइट, मोबाइल ऐप, हेल्प डेस्क, खोया-पाया केंद्र और 24×7 कॉल सेंटर भी संचालित किए जाएंगे।
जिलाधिकारी ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि निर्धारित समय सीमा में सभी तैयारियां पूरी कर पितृपक्ष मेला-2026 को श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित, सुव्यवस्थित और यादगार बनाया जाए।

दिल छू लेने वाली कहानी; 25 साल तक भीख मांगकर गुजारा, अपनों ने छोड़ा तो वेदा बनी सहारा

कहते हैं कि इंसानियत आज भी जिंदा है, और इसका एक मार्मिक उदाहरण बोधगया में देखने को मिला। पिछले करीब 25 वर्षों से शहर के बाजारों में भीख मांगकर जीवन यापन करने वाली एक वृद्ध महिला को आखिरकार सुरक्षित आश्रय मिल गया। उम्र और बीमारी के कारण जब उनका शरीर जवाब देने लगा तो अपने भी उनसे दूर हो गए। वह सड़क किनारे लावारिस और असहाय अवस्था में पड़ी मिलीं।
इसकी सूचना मिलने पर वेदा ओल्ड एज होम की संचालिका वेदा अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचीं और वृद्ध महिला को अपने संरक्षण में लिया। महिला की तबीयत खराब होने के कारण पहले उनका चिकित्सकीय उपचार कराया जाएगा, इसके बाद उन्हें ओल्ड एज होम में रखा जाएगा, जहां उनके भोजन, इलाज और देखभाल की पूरी व्यवस्था की जाएगी।
वेदा ने बताया कि उनका संस्थान पिछले लगभग 20 वर्षों से गया जिले में बेसहारा, अनाथ और उपेक्षित वृद्ध महिला-पुरुषों की सेवा कर रहा है। बोधगया वर्तमान में ओल्ड एज होम में 23 वृद्धजन रह रहे हैं, जिनकी भोजन, दवा और अन्य आवश्यक जरूरतों का नियमित रूप से ध्यान रखा जाता है।

उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे कई बुजुर्ग हैं, जिन्हें परिवार का साथ नहीं मिल पाता और वे मजबूरी में सड़क पर जीवन बिताने को विवश हो जाते हैं। ऐसे लोगों को सम्मानजनक जीवन देना ही संस्था का उद्देश्य है। उन्होंने समाज के लोगों को यह संदेश दिया कि अपने बुजुर्ग परिवार की देखभाल करने की अपील की है।कई ऐसे परिजन है जिन्होंने अपने वृद्ध मां पिया को घर से निकाल दिया है।जिन्हें ओल्ड एज होम का सहारा लेना पड़ रहा है।

बोधगया की इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जब अपने साथ छोड़ देते हैं, तब भी संवेदनशील लोग और सामाजिक संस्थाएं किसी की जिंदगी में उम्मीद की नई किरण बन सकती हैं।

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बोधगया में मॉनेस्ट्री की छत से गिरा बौद्ध भिक्षु, जीवक क्लीनिक की एम्बुलेंस ने दिखाई तत्परता

बोधगया स्थित वट पा बौद्ध मॉनेस्ट्री में मंगलवार की देर रात एक बौद्ध भिक्षु के साथ बड़ा हादसा हो गया। जानकारी के अनुसार, भिक्षु रात में मॉनेस्ट्री की छत पर सो रहे थे। इसी दौरान अचानक संतुलन बिगड़ने से वह छत से नीचे गिर पड़े, जिसमें उन्हें गंभीर रूप से घायल हो गया है।
घटना के बाद मॉनेस्ट्री के सदस्यों ने बोधगया के जीवक क्लीनिक को सूचना दी। सूचना मिलते ही जीवक क्लीनिक की अत्याधुनिक एम्बुलेंस मौके पर पहुंची और गंभीर रूप से घायल भिक्षु को प्राथमिक सहायता देते हुए बेहतर इलाज के लिए गया ले जाया गया। फिलहाल उनका इलाज गया के एक निजी अस्पताल में चल रहा है।

जीवक क्लीनिक द्वारा लंबे समय से बोधगया में निःशुल्क होमियोपैथी क्लीनिक का संचालन किया जा रहा है। यहां गया जिले के सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। इसके साथ ही क्लीनिक की अत्याधुनिक एम्बुलेंस आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों के लिए जीवन रक्षक साबित हो रही है और समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

देव स्नान के बाद 15 दिनों के लिए बंद हुआ श्री जगन्नाथ मंदिर का पट, 16 जुलाई को निकलेगी भव्य रथयात्रा

प्राचीन श्री जगन्नाथ मंदिर न्यास समिति, बोधगया द्वारा आयोजित भगवान श्री जगन्नाथ के वार्षिक उत्सव की शुरुआत देव स्नान पर्व के साथ हो गई। प्रेस वार्ता में न्यास समिति के सचिव राय मदन किशोर ने बताया कि प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी धार्मिक परंपराओं के अनुसार कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि देव स्नान के अवसर पर भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का विशेष स्नान, पूजन एवं भोग अर्पण किया गया। इसके बाद भगवान को पुनः गर्भगृह में स्थापित कर दिया गया है। अब अगले 15 दिनों तक मंदिर का पट आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए बंद रहेगा। इस अवधि को भगवान का “अनसर” अथवा “रुग्णावकाश” काल माना जाता है, जिसमें मान्यता के अनुसार देव स्नान के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं।
राय मदन किशोर ने बताया कि 14 जुलाई को मंदिर का पट पुनः खोला जाएगा। इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना के साथ भगवान को 56 भोग अर्पित किया जाएगा तथा श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन भी होगा। 15 जुलाई को भजन संध्या एवं धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। वहीं 16 जुलाई को भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों तथा आम श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया जाएगा। 17 जुलाई की सुबह रथ वापसी (बहुदा यात्रा) संपन्न होगी, जिसके बाद भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
इस अवसर पर गया कॉलेज के अंग्रेजी विभाग के प्राध्यापक टी. के. नारायण ने रथयात्रा और भक्ति आंदोलन के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भक्ति आंदोलन का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों, विशेषकर वंचित समुदायों को धार्मिक गतिविधियों में समान भागीदारी दिलाना था। रथयात्रा इसी समावेशी परंपरा का प्रतीक है, जिसमें सभी लोग मिलकर भगवान के रथ को खींचते हैं।
उन्होंने बताया कि मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ जनमानस के दुख-दर्द को अपने ऊपर ले लेते हैं, इसलिए देव स्नान के बाद वे 15 दिनों तक विश्राम करते हैं। इस दौरान पुजारी उन्हें औषधीय जड़ी-बूटियों से बने काढ़े एवं विशेष पौष्टिक भोग अर्पित करते हैं। स्वस्थ होने के बाद भगवान पुनः भक्तों को दर्शन देते हैं और समाज के कल्याण का संदेश प्रदान करते हैं।

रिपोर्ट:- सुदीप्तो नाग

महाबोधी महाविहार मुक्ति आंदोलन के 501 दिन पूरे, बीटी एक्ट 1949 हटाने को लेकर देशभर के बौद्ध अनुयायी बोधगया में जुटे

बोधगया में महाबोधी महाविहार मुक्ति राष्ट्रीय आंदोलन समिति के बैनर तले महाबोधी महाविहार मुक्ति आंदोलन के 501वें दिन बोधगया में तीन दिवसीय बैठक एक निजी होटल में आयोजित की गई। बैठक में देश के विभिन्न राज्यों से आए बौद्ध अनुयायियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान महाबोधी महाविहार के प्रबंधन को पूरी तरह बौद्ध समुदाय को सौंपने तथा बीटी एक्ट 1949 (बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949) को रद्द करने की मांग को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि महाबोधी महाविहार बौद्ध धर्म का सबसे पवित्र तीर्थस्थल है, इसलिए इसका प्रबंधन का अधिकार बौद्ध समाज के पास होना चाहिए। इसी मांग को लेकर पिछले कई महीनों से शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी है और अब यह 501वें दिन में प्रवेश कर चुका है।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे आकाश लामा ने बताया कि आंदोलन को देशभर के बौद्ध समाज का लगातार समर्थन मिल रहा है। बैठक में आगे की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा तथा निर्णय लिया जाएगा। आंदोलन को और व्यापक स्तर पर चलाया जाएगा। बैठक के बाद प्रधानमंत्री, बिहार के मुख्यमंत्री तथा राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर महाबोधी महाविहार से जुड़े मुद्दों पर ध्यान आकृष्ट कराया जाएगा । बीटी एक्ट 1949 को निरस्त करने और महाबोधी मंदिर का प्रबंधन बौद्ध समुदाय को सौंपने की मांग दोहराई गई है।

बैठक में उपस्थित प्रतिनिधियों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहेगा।केंद्र और राज्य सरकार से इस विषय पर शीघ्र पहल करते हुए बौद्ध समाज की भावनाओं का सम्मान करने की अपील की।

गया में किन्नर समाज ने बैठाया ताजिया, गंगा-जमुनी तहजीब की पेश की अनूठी मिसाल

मुहर्रम के अवसर पर शहर के रामशिला में किन्नर समाज ने सदियों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन करते हुए ताजिया बैठाया। किन्नर समाज द्वारा पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ ताजिया स्थापित किया गया। इस अवसर पर अखिल भारतीय किन्नर सदाबहार विकास समिति के सचिव सुरेश किन्नर उर्फ सुरेश हिजड़ा ने बताया कि उनका समाज पिछले कई वर्षों से मुहर्रम के अवसर पर ताजिया बैठाकर रस्मों का निर्वहन करते आ रहे है।

किन्नर समाज हमेशा से सर्वधर्म समभाव की भावना में विश्वास रखता है। जिस उत्साह और श्रद्धा के साथ समाज हिंदू धर्म के सभी प्रमुख पर्व-त्योहारों को मनाता है, उसी तरह इस्लाम धर्म के पवित्र अवसरों और शहादत के दिनों को भी पूरे सम्मान के साथ याद करता है। उन्होंने कहा कि कर्बला के शहीदों का बलिदान पूरी मानवता के लिए सत्य, न्याय और इंसानियत का संदेश देता है।
मुहर्रम के मौके पर सामाजिक सौहार्द, भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब की जीवंत मिसाल पेश करती है।बिना किसी भेदभाव के लोगों को एकता और आपसी सम्मान का संदेश देती है।

BT एक्ट 1949 रद्द करने की मांग को लेकर बौद्ध भिक्षुओं ने किया भूख हड़ताल, आंदोलन के 500 दिन हुआ पूरा

विश्व प्रसिद्ध महाबोधि महाविहार को महाबोधि मंदिर के प्रबंधन से जुड़े बोधगया टेंपल एक्ट (बीटी एक्ट) 1949 को समाप्त कर महाविहार का पूर्ण नियंत्रण बौद्ध समाज को सौंपने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन शुक्रवार को 500वां दिन पूरा हो गया है। इस मौके पर बीटीएमसी गोलंबर पर बौद्ध भिक्षुओं ने एकदिवसीय भूख हड़ताल किया है।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे आकाश लामा ने कहा कि जिस प्रकार मंदिरों का प्रबंधन हिंदू, मस्जिदों का मुस्लिम और चर्चों का ईसाई समुदाय करता है, उसी प्रकार महाबोधि महाविहार का प्रबंधन भी पूरी तरह बौद्ध समाज को सौंपा जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान बीटी एक्ट 1949 के तहत गठित प्रबंधन समिति में बौद्धों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है और यह अधिनियम असंवैधानिक है। इसे निरस्त कर महाविहार का संचालन पूर्ण रूप से बौद्ध समुदाय को दिया जाए। बताया कि यह आंदोलन 12 फरवरी 2025 से लगातार जारी है।वर्ष 2012 में इस मामले को लेकर न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया गया था, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकल सका।
भूख हड़ताल में देश के विभिन्न राज्यों से आए बौद्ध भिक्षुओं और अनुयायियों ने भाग लिया। वहीं पूरे विश्व में आज भूख हड़ताल किया गया है। मुहर्रम को देखते हुए प्रशासन ने भूख हड़ताल की अनुमति नहीं दी थी, जिसके बाद प्रशासन ने धरनास्थल से भिक्षुओं को हटा दिया। इसके बावजूद आंदोलन जारी रखने की बात कही है कहा कि संघर्ष जारी रहेगा।