दिल छू लेने वाली कहानी; 25 साल तक भीख मांगकर गुजारा, अपनों ने छोड़ा तो वेदा बनी सहारा
कहते हैं कि इंसानियत आज भी जिंदा है, और इसका एक मार्मिक उदाहरण बोधगया में देखने को मिला। पिछले करीब 25 वर्षों से शहर के बाजारों में भीख मांगकर जीवन यापन करने वाली एक वृद्ध महिला को आखिरकार सुरक्षित आश्रय मिल गया। उम्र और बीमारी के कारण जब उनका शरीर जवाब देने लगा तो अपने भी उनसे दूर हो गए। वह सड़क किनारे लावारिस और असहाय अवस्था में पड़ी मिलीं।
इसकी सूचना मिलने पर वेदा ओल्ड एज होम की संचालिका वेदा अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचीं और वृद्ध महिला को अपने संरक्षण में लिया। महिला की तबीयत खराब होने के कारण पहले उनका चिकित्सकीय उपचार कराया जाएगा, इसके बाद उन्हें ओल्ड एज होम में रखा जाएगा, जहां उनके भोजन, इलाज और देखभाल की पूरी व्यवस्था की जाएगी।
वेदा ने बताया कि उनका संस्थान पिछले लगभग 20 वर्षों से गया जिले में बेसहारा, अनाथ और उपेक्षित वृद्ध महिला-पुरुषों की सेवा कर रहा है। बोधगया वर्तमान में ओल्ड एज होम में 23 वृद्धजन रह रहे हैं, जिनकी भोजन, दवा और अन्य आवश्यक जरूरतों का नियमित रूप से ध्यान रखा जाता है।
उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे कई बुजुर्ग हैं, जिन्हें परिवार का साथ नहीं मिल पाता और वे मजबूरी में सड़क पर जीवन बिताने को विवश हो जाते हैं। ऐसे लोगों को सम्मानजनक जीवन देना ही संस्था का उद्देश्य है। उन्होंने समाज के लोगों को यह संदेश दिया कि अपने बुजुर्ग परिवार की देखभाल करने की अपील की है।कई ऐसे परिजन है जिन्होंने अपने वृद्ध मां पिया को घर से निकाल दिया है।जिन्हें ओल्ड एज होम का सहारा लेना पड़ रहा है।
बोधगया की इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जब अपने साथ छोड़ देते हैं, तब भी संवेदनशील लोग और सामाजिक संस्थाएं किसी की जिंदगी में उम्मीद की नई किरण बन सकती हैं।


