देव स्नान के बाद 15 दिनों के लिए बंद हुआ श्री जगन्नाथ मंदिर का पट, 16 जुलाई को निकलेगी भव्य रथयात्रा
प्राचीन श्री जगन्नाथ मंदिर न्यास समिति, बोधगया द्वारा आयोजित भगवान श्री जगन्नाथ के वार्षिक उत्सव की शुरुआत देव स्नान पर्व के साथ हो गई। प्रेस वार्ता में न्यास समिति के सचिव राय मदन किशोर ने बताया कि प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी धार्मिक परंपराओं के अनुसार कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि देव स्नान के अवसर पर भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का विशेष स्नान, पूजन एवं भोग अर्पण किया गया। इसके बाद भगवान को पुनः गर्भगृह में स्थापित कर दिया गया है। अब अगले 15 दिनों तक मंदिर का पट आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए बंद रहेगा। इस अवधि को भगवान का “अनसर” अथवा “रुग्णावकाश” काल माना जाता है, जिसमें मान्यता के अनुसार देव स्नान के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं।
राय मदन किशोर ने बताया कि 14 जुलाई को मंदिर का पट पुनः खोला जाएगा। इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना के साथ भगवान को 56 भोग अर्पित किया जाएगा तथा श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन भी होगा। 15 जुलाई को भजन संध्या एवं धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। वहीं 16 जुलाई को भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों तथा आम श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया जाएगा। 17 जुलाई की सुबह रथ वापसी (बहुदा यात्रा) संपन्न होगी, जिसके बाद भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
इस अवसर पर गया कॉलेज के अंग्रेजी विभाग के प्राध्यापक टी. के. नारायण ने रथयात्रा और भक्ति आंदोलन के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भक्ति आंदोलन का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों, विशेषकर वंचित समुदायों को धार्मिक गतिविधियों में समान भागीदारी दिलाना था। रथयात्रा इसी समावेशी परंपरा का प्रतीक है, जिसमें सभी लोग मिलकर भगवान के रथ को खींचते हैं।
उन्होंने बताया कि मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ जनमानस के दुख-दर्द को अपने ऊपर ले लेते हैं, इसलिए देव स्नान के बाद वे 15 दिनों तक विश्राम करते हैं। इस दौरान पुजारी उन्हें औषधीय जड़ी-बूटियों से बने काढ़े एवं विशेष पौष्टिक भोग अर्पित करते हैं। स्वस्थ होने के बाद भगवान पुनः भक्तों को दर्शन देते हैं और समाज के कल्याण का संदेश प्रदान करते हैं।
रिपोर्ट:- सुदीप्तो नाग

