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‘अधिकारी सहयोग करें तो हो सकती है पूर्ण नशाबंदी, महादलितों की जमीन पर कब्जा हटाने को चले अभियान’ : जीतन राम मांझी

गया के गहलौर में आयोजित दशरथ मांझी महोत्सव में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने नशाबंदी और महादलित समाज की जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर सरकार और प्रशासन से गंभीर पहल की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर पदाधिकारी सहयोग करें तो नशाबंदी को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है। सरकार नीति बनाए या नहीं, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शराबबंदी की नीति बनाई है और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी इसका पालन कर रहे हैं।कहा कि गुजरात में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्मस्थल है और वहां भी नशाबंदी लागू है। वैसा हीं अपना कर तो देखिए।शराब और अन्य नशे से समाज को आर्थिक और सामाजिक क्षति हो रही है। उन्होंने कहा कि नशे की वजह से गरीब परिवारों की मेहनत की कमाई बर्बाद होती है और सामाजिक समस्याएं भी बढ़ती हैं। उन्होंने समाज के लोगों से संकल्प लेकर नशे को अलविदा कहने की अपील की।
खुद का उदाहरण देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उनके माता-पिता मजदूरी कर उन्हें पढ़ाया-लिखाया। उन्होंने कहा कि जीवन में संघर्ष करते हुए उन्होंने राजनीति का पहाड़ काटने का काम किया और आज केंद्रीय मंत्री के पद तक पहुंचे हैं। दशरथ मांझी ने भी अपने जीवन में संघर्ष और मेहनत को प्राथमिकता दी तथा कभी नशे की लत की बात नहीं की। ऐसे में समाज को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने महादलित समाज की जमीन पर दूसरे लोगों के कब्जे का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि महादलितों की जमीन को कब्जामुक्त कराने के लिए सरकार को अभियान चलाने की जरूरत है। जिला प्रशासन को इन क्षेत्रों में विशेष रूप से कार्य करना चाहिए और गरीबों की जमीन की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
उन्होंने प्रशासन को चेताते हुए कहा कि यदि अधिकारी इस दिशा में गंभीरता से काम नहीं करेंगे तो कहा कि हम है मंत्री इस मामले को दूसरे रूप में उठाकर दशरथ मांझी के सपनों को साकार करने के लिए संघर्ष करेंगे। उन्होंने कहा कि दशरथ मांझी का सपना केवल एक पहाड़ काटना नहीं था, बल्कि समाज के वंचित और गरीब लोगों के जीवन में बदलाव लाना भी था।