महाबोधी महाविहार मुक्ति आंदोलन के 501 दिन पूरे, बीटी एक्ट 1949 हटाने को लेकर देशभर के बौद्ध अनुयायी बोधगया में जुटे
बोधगया में महाबोधी महाविहार मुक्ति राष्ट्रीय आंदोलन समिति के बैनर तले महाबोधी महाविहार मुक्ति आंदोलन के 501वें दिन बोधगया में तीन दिवसीय बैठक एक निजी होटल में आयोजित की गई। बैठक में देश के विभिन्न राज्यों से आए बौद्ध अनुयायियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान महाबोधी महाविहार के प्रबंधन को पूरी तरह बौद्ध समुदाय को सौंपने तथा बीटी एक्ट 1949 (बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949) को रद्द करने की मांग को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि महाबोधी महाविहार बौद्ध धर्म का सबसे पवित्र तीर्थस्थल है, इसलिए इसका प्रबंधन का अधिकार बौद्ध समाज के पास होना चाहिए। इसी मांग को लेकर पिछले कई महीनों से शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी है और अब यह 501वें दिन में प्रवेश कर चुका है।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे आकाश लामा ने बताया कि आंदोलन को देशभर के बौद्ध समाज का लगातार समर्थन मिल रहा है। बैठक में आगे की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा तथा निर्णय लिया जाएगा। आंदोलन को और व्यापक स्तर पर चलाया जाएगा। बैठक के बाद प्रधानमंत्री, बिहार के मुख्यमंत्री तथा राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर महाबोधी महाविहार से जुड़े मुद्दों पर ध्यान आकृष्ट कराया जाएगा । बीटी एक्ट 1949 को निरस्त करने और महाबोधी मंदिर का प्रबंधन बौद्ध समुदाय को सौंपने की मांग दोहराई गई है।
बैठक में उपस्थित प्रतिनिधियों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहेगा।केंद्र और राज्य सरकार से इस विषय पर शीघ्र पहल करते हुए बौद्ध समाज की भावनाओं का सम्मान करने की अपील की।


