Breaking News
आनंद मोहन का दावा: चेतन आनंद ने बचाई थी सरकार, एनडीए ने कोई कृपा नहीं की

गया के एक निजी होटल में शनिवार महाराणा प्रताप की 486 वीं जयंती समारोह का आयोजन किया गया।समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व सांसद आनंद मोहन शामिल हुए।
इस मौके पर पूर्व सांसद आनंद मोहन ने कहा कि सीतामढ़ी में 28 जून को अश्वारोही प्रतिमा लगाने जा रहे है उसका निमंत्रण देने आए है।भविष्य में कार्य योजना है कि अपने पुराने साथियों के साथ बैठकर बिहार की मूलभूत समस्याओं पर बात की जाय।अंतिम दौर में अंतिम पाली जमकर खेली जाए इन जनसमस्याओं को लेकर।

सम्राट चौधरी के कार्यकाल पर कहा कि कार्यकाल पूरा करना चाहिए।जो एक गलत मैसेज गया नीतीश कुमार के अपदश्द करने के बाद।दूसरा गलत संदेश नहीं जाए।चुकी पिछड़ों और अतिपिछड़ों में आक्रोश है।वह बहुत हद तक सम्राट चौधरी के आने से बैलेंस हुआ है।भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से कहूँगा की जो कुछ हुआ अगर भरपाई करनी है तो छेड़छाड़ मुनासिब नहीं है।सावधान करूंगा कि आग से खेलने की कोशिश नहीं करें।सम्राट चौधरी को अपना कार्यकाल पूरा करने दें।

पुत्रमोह पर कहा कि जिसको कुछ मूल बातों से भागना है जवाब नहीं देना है तो ऐसे हीं आरोप लगेंगे।एनडीए ने कोई कृपा नहीं की थी।चेतन आनंद ने सरकार को बचाया था।शिवहर से वह एनडीए की सीट नहीं थी।मगध में औरंगाबाद से एनडीए का सीट सन्नाटा था। जीत पिछले 15 वर्षों में नहीं हुआ था।वहां जाकर हार का सन्नाटा तोड़ने का काम चेतन आनंद ने किया ।कुछ लोग पुत्रमोह और पत्नी मोह की बात करते है कार्यकर्ताओं के सवाल में हाल के दशकों में 1 उदाहरण दें कि कार्यकर्ताओं के सवाल पर जीती हुई सीट पर लात मारकर कार्यकर्ताओं के साथ खड़ा हो गया हो।लवली आनंद ने वह किया।जिसको जो कहना है कहें।

थैली संस्कृति पर कहा कि यूथ फॉर डेमोक्रेसी कर आनंद मोहन निकलेंगे।जरूरी नहीं कि बड़ी सभा हो।गिरोह पार्टी के रूप ले लिया है।पार्टी,नेता के प्रति वफादारी नहीं हैं ऐसे लोगों को पकड़ पकड़ कर टिकट दिया गया फिर मेंबर बनाया गया।पहली बार जो जीतकर आया पार्टी के पुराने लोग इंतजार करते रह गए और पहली बार जितने वाले को मंत्री बना दिया गया।

नीतीश कुमार पर कहा कि यह मेरे ब्यान को कट पेस्ट किया है।हमने कहा कि निशांत कुमार की सारी सम्भावनाओं पर विराम लगा दिया गया।हमने कहा सीएम बनाओ डिप्टी सीएम मतलब चुप मंत्री।हमने डिप्टी सीएम का विरोध किया। टीम और जदयू कार्यकर्ता चाहती थी निशांत डिप्टी सीएम बने।तो लोगो ने मान नहीं रहा है।रातों रात निशांत मान भी जाते है और स्वास्थ्य मंत्री बन जाते है तो यह साज़िश थी।एक व्यक्ति को सीएम भी नहीं बनने दो और जन नेता भी नहीं बनने दो।अगर वह घूमते तो रिस्पोंस मिलता तो वह जन नेता होते।यह संभावना पर भी रोक लगाया।स्वास्थ्य मंत्री बनाकर 3 दिनों तक चैनल,फेसबुक पर ट्रॉल कराया कि बाप बेटा बीमार था इनको डॉक्टर की जरूरत थी इसलिए स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया।किसने यह चलवाया था।खोजिए जिसने ट्रोल करवाया वह हम पर दोष दे रहे है कि हमने कहा।हमने कभी नीतीश कुमार या जदयू के खिलाफ कभी अपने अभियान के दौरान नहीं कही है।जदयू में यह थैली संस्कृति पनप रही है।विसंगति फैली है। ढाई से तीन वर्षों में यह आई है नीतीश कुमार के मजबूरी का फायदा लेकर आया है।

जेपी आन्दोलन में निकले तो व्यवस्था परिवर्तन की बाते हुई थी सत्ता परिवर्तन की नहीं।आज रास्ते से सभी भटक गया।जेल में रहे यह सबको मालूम था।यह रोकने की साजिश थी।आज फिर निकले है तो रोकने की कोई साजिश हो सकती है।हम लड़ेंगे कि कहीं आने वाली पीढ़ी यह न कहे कि आनंद मोहन कायर हो गया।

बिहार में एनकाउंटर पर कहा कि किसी को भी हथियार लहराने का अधिकार लोकतंत्र नहीं देता है।लेकिन मैं हर बुलडोजर और एनकाउंटर संस्कृति का विरोधी हूं।फैसला कोर्ट करेगा।इस बात शासक जितना जल्दी समझ ले यह अच्छा है।निहत्था नहीं था।अगर निहत्था होता तो किसी की ताकत नहीं की किसी को गोली मार दें।जो विरोध कर रहे है या समर्थन कर रहे है उस पर मैं जो सही है वही बोल रहा हूं कि लोकतंत्र में रिवॉल्वर लहराने का हक नहीं है उसी तरह पुलिस को एनकाउंटर का हक नहीं है। तो फिर न्यायपालिका क्यों है।यादव है कि तिवारी है इसे लेकर हम नहीं बैठे है।
आज यह कोचिंग शिक्षा की असफलता का परिणाम है यह कोचिंग कल्चर है।फेल कर रहे है इसलिए कुकुरमुत्ते की तरह कोचिंग खुल रहे है।यह खेल जो हो रहा है वह गंदा है।चीन और पाकिस्तान को दस्तावेज बेचा है जो गद्दार की श्रेणी में आते है।उसमें कोई भारत का मुसलमान नहीं है।किसी बात पर हिंदू,मुस्लमान कनेक्शन लाना यह आनन्द मोहन का काम नहीं है।

सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सभी लोग अपने आप को कोई राजवंश के महाराजा से जोड़ते है तो दलित,पिछड़ा का रोना क्यों है।इसलिए महापुरुषों की घेराबंदी टूटनी चाहिये।यह संकीर्णता से उतनी चाहिए।

कोई जगतगुरु नहीं हुआ।अगर हिंदुस्तान जगतगुरु हुआ तो वह महात्मा बुद्ध थे।जब सुविधा,दूरसंचार नहीं थी उस वक्त बुद्ध ने दुनिया के दो तिहाई मुल्कों को अपने विचारों से ढकने का काम किया।उसके बाद महात्मा गांधी थे। जहां हम पैदा हुए उस समाज की दो धाराएं है।एक महाराणा प्रताप की तो दूसरी मान सिंह की है।लोग पुत्रमोह का आरोप लगाते है।जब मंत्रिमंडल की सुगबुगाहट नहीं थी।सत्ता परिवर्तन हुआ था।मुझे यहां बुलाया गया और गन पॉइंट पर इस्तीफा लिया गया।घेराबंदी जो है वह खुद का सृजन है।मगध में एक शासक पुष्यमित्र था जिसने धोखे से राजा बना था।उसी को सैकड़ो वर्षों के बाद दुहराया गया है।चाटुकार,चंडाल चौकरी लोगो ने अपरोक्ष रूप से सत्ता पर कब्जा कर लिया है।जदयू पर कब्जा किया गया एजेंट छोड़े गए है।जब तक नीतीश कुमार सचेत थे तब तक अडिग खड़ा रहा है। अतिपिछड़ों को सन्देश देना चाहते है कि 2 हीं सरकार पिछड़ों की है एक स्टालिन और दूसरा नीतीश सरकार।कोई दोषारोपण नहीं करूंगा।सभी को लगता है मंत्री बने।सभी दलों को यह होता है।इसे मै दोष नहीं दूंगा।यह दल के अंदर बैठे गद्दारों को दोष दूंगा जिसने यह कार्य को किया

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *