उर्वरक वितरण में गड़बड़ी पड़ी भारी! अनियमितता मिली तो सीधे होगा लाइसेंस रद्द, 2 एफआईआर और 16 लाइसेंस रद्द
गया जिले में उर्वरक वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता पर कृषि विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। जिला कृषि पदाधिकारी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यूरिया और डीएपी के साथ अन्य उत्पादों की जबरन टैगिंग कर बिक्री करने वाले थोक एवं खुदरा विक्रेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अनियमितता पाए जाने पर सीधे लाइसेंस रद्द किया जाएगा।
18 जून को आयोजित “खेत बचाओ अभियान-सह-कृषि जनकल्याण चौपाल एवं संवाद” कार्यक्रम में किसानों और खुदरा उर्वरक विक्रेताओं ने शिकायत की कि यूरिया एवं डीएपी की आपूर्ति के साथ अन्य उत्पादों की टैगिंग की जा रही है। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला कृषि पदाधिकारी ने संबंधित कंपनियों के क्षेत्रीय अधिकारियों और थोक उर्वरक विक्रेताओं से स्पष्टीकरण मांगा है।
कृषि विभाग ने चेतावनी दी है कि बैठक के बाद भी यदि टैगिंग की शिकायतें मिलती हैं तो संबंधित कंपनी और थोक विक्रेता को चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि जिले में वर्तमान में 15110.555 मीट्रिक टन यूरिया, 3455.70 मीट्रिक टन डीएपी, 10136.870 मीट्रिक टन एनपीके, 6621.875 मीट्रिक टन एसएसपी तथा 1526.80 मीट्रिक टन एमओपी उपलब्ध है। किसानों से डीएपी के विकल्प के रूप में अन्य मिश्रित उर्वरकों के उपयोग की भी अपील की गई है।
उन्होंने किसानों से उर्वरकों की कमी को लेकर फैलाए जा रहे भ्रामक प्रचार और अफवाहों से बचने की अपील करते हुए कहा कि जिले में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हैं। उर्वरक दुकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है और अब तक उर्वरक वितरण में अनियमितता के मामलों में 2 प्राथमिकी दर्ज तथा 16 लाइसेंस रद्द किए जा चुके हैं। विभाग ने साफ किया है कि किसानों के हितों से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

