नाम भी, जिम्मेदारी भी: गया की मंथन वाटिका में हर पौधे के साथ जुड़ा IAS अधिकारी का नाम
गया शहर के ब्रह्मयोनि पहाड़ के नीचे स्थित बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (बिपार्ड) परिसर में विकसित ‘मंथन वाटिका’ इन दिनों लोगों के आकर्षण का केंद्र बना है। इस वाटिका की सबसे खास बात यह है कि यहां लगाए गए प्रत्येक पौधे के साथ किसी न किसी आईएएस अधिकारी का नेम प्लेट लगा हुआ है। बंजर पड़ी जमीन पर विकसित की गई यह वाटिका अब हरियाली और पर्यावरण संरक्षण की अनोखी पहचान बन गई है।
वाटिका में करीब 200 से अधिक पौधे लगाए गए हैं। इन पौधों पर बिहार के विभिन्न जिलों के जिलाधिकारी, आयुक्त, सचिव समेत कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के नाम अंकित हैं। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारियों की सामाजिक जिम्मेदारी और जनभागीदारी का भी संदेश दे रही है।
दिसंबर 2025 में गया स्थित बिपार्ड में बिहार सरकार द्वारा सभी आईएएस अधिकारियों के लिए एक विशेष ‘मंथन कार्यक्रम’ आयोजित किया गया था। इस दौरान राज्य के विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी व्यापक चर्चा हुई थी। चर्चा के बाद ब्रह्मयोनि पहाड़ के नीचे स्थित बंजर भूमि पर सामूहिक वृक्षारोपण अभियान चलाया गया, जिसमें सभी अधिकारियों ने अपने नाम का एक-एक पौधा लगाया और उसके पास अपना नेम प्लेट भी स्थापित किया।
इस पहल का उद्देश्य केवल हरियाली बढ़ाना नहीं, बल्कि आम लोगों को भी वृक्षारोपण के लिए प्रेरित करना था। आज यह मंथन वाटिका पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का एक जीवंत उदाहरण बनकर उभरी है।
मंथन वाटिका देखने पहुंचे स्थानीय निवासी सुशांत कुमार ने कहा कि यह पहल बेहद सराहनीय है। उन्होंने बताया कि तेजी से घटते वन क्षेत्र और बढ़ते तापमान के बीच इस तरह का वृक्षारोपण पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। आने वाले वर्षों में ये पौधे बड़े होकर लोगों को छाया, स्वच्छ हवा और बेहतर पर्यावरण प्रदान करेंगे। साथ ही अधिकारियों के नाम जुड़े होने से यह पहल लोगों को भी वृक्षारोपण के लिए प्रेरित करेगी।
वहीं गया नगर निगम के नगर आयुक्त अभिषेक पलासिया ने बताया कि मंथन कार्यक्रम के दौरान बिहार के विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई थी। इसी सोच के तहत सभी आईएएस अधिकारियों ने वृक्षारोपण कर समाज को यह संदेश देने का प्रयास किया कि विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।
उन्होंने कहा कि यदि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, पर्याप्त जल और बेहतर पर्यावरण देना है तो प्रत्येक व्यक्ति को वृक्षारोपण और जल संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी बनाना होगा। मंथन वाटिका इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास है।
आज यह मंथन वाटिका न सिर्फ हरियाली की नई पहचान बन चुकी है, बल्कि यह संदेश भी दे रही है कि जब प्रशासन और समाज साथ आएं तो बंजर जमीन भी पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बन सकती है।


