दाखिल-खारिज से ई-नापी तक लापरवाही, बोधगया के तत्कालीन सीओ पर गिरी गाज,डीएम ने अनुशासनिक कार्रवाई की कि अनुशंसा
गया डीएम शशांक शुभंकर द्वारा बोधगया के तत्कालीन अंचल अधिकारी श्री चंद्र शेखर के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों, राजस्व कार्यों के निष्पादन में लगातार लापरवाही तथा लंबित मामलों के समयबद्ध निस्तारण में विफल रहने के आरोपों के आधार पर अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार, पटना को आरोप पत्र भेजा गया है। बताया कि बोधगया अंचल में दाखिल-खारिज, परिमार्जन, ई-नापी, अभियान बसेरा-2, आरओआर (ROR) सहित अन्य राजस्व मामलों के निष्पादन में लगातार शिथिलता बरती गई। इस संबंध में जिला पदाधिकारी द्वारा कई बार पत्राचार कर लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया, लेकिन अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि विभिन्न तिथियों को आयोजित जिला एवं विभागीय समीक्षा बैठकों में भी अंचल अधिकारी को लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद कार्यों में संतोषजनक प्रगति नहीं पाई गई, जिससे प्रशासनिक कार्यों के प्रति उदासीनता एवं लापरवाही परिलक्षित हुई।
समीक्षा के दौरान पाया गया कि बोधगया अंचल में बड़ी संख्या में राजस्व संबंधी आवेदन लंबित हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार दाखिल-खारिज के 2666 आवेदन लंबित हैं, जिनमें 860 आवेदन 120 दिनों से अधिक समय से लंबित हैं। इसके अतिरिक्त परिमार्जन लेफ्ट आउट के 2277, परिमार्जन प्लस के 1943, ई-नापी के 143, सहयोग पोर्टल के 156 तथा जन शिकायत के 124 मामले भी लंबित पाए गए।
जिला पदाधिकारी ने कहा कि आम नागरिकों को समयबद्ध एवं पारदर्शी राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी स्तर पर लापरवाही, उदासीनता अथवा सरकारी कार्यों में शिथिलता को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजस्व मामलों के त्वरित निष्पादन एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है तथा कार्य में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों एवं कर्मियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।







गया जिले के फतेहपुर प्रखंड अंतर्गत कठौतिया केवाल पंचायत के रघुनाथ नगर गांव में गुरुवार शाम करीब तीन वर्षीय पीयूष कुमार (पिता–दिनेश कुमार) खेलते-खेलते लगभग 30 से 35 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया। घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन हरकत में आया और जिला पदाधिकारी के निर्देश पर अंचल अधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी तथा फतेहपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। प्रशासन ने तत्काल बोरवेल में पाइप के माध्यम से ऑक्सीजन की व्यवस्था कराई, ताकि बच्चे को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती रहे। वहीं पटना से एनडीआरएफ की विशेषज्ञ टीम और एसडीआरएफ की टीम भी घटनास्थल पहुंचकर वैज्ञानिक तरीके से रेस्क्यू अभियान में जुट गई। करीब सात घंटे तक चले चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन के दौरान प्रशासन, आपदा राहत बल और स्थानीय लोगों के समन्वय से आखिरकार मासूम पीयूष को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। बच्चे के सकुशल बाहर आते ही घटनास्थल पर मौजूद लोगों और परिजनों ने राहत की सांस ली। परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और उन्होंने प्रशासन व रेस्क्यू टीम का आभार जताया।

