Breaking News
महाबोधि मंदिर के बाहर अचानक क्यों पैसा मांगने लगे विदेशी पर्यटक? बम्बू बैंक में जुटा रहे थे ये रकम

बोधगया के महाबोधि मंदिर के बाहर शनिवार को विदेशी पर्यटकों का एक अलग ही रूप देखने को मिला। मलेशिया ,ताइवान सहित कई देशों से आए पर्यटक हाथों में ‘बम्बू बैंक’ लेकर खड़े थे और लोगों से नेपाल में आए बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए सहयोग मांग रहे थे। विदेशी पर्यटकों को इस तरह हाथ में बांस से बने बंबू बैंक लेकर खड़ा देखकर मंदिर के बाहर आने-जाने वाले लोगों की नजरें भी उन पर रुक गईं।

ये विदेशी पर्यटक बोधगया की सुची फाउंडेशन संस्था से जुड़े हैं। संस्था की ओर से नेपाल में आई बाढ़ से प्रभावित लोगों की सहायता के लिए यह अनोखी पहल शुरू की गई है। पर्यटक लोगों से अपनी क्षमता के अनुसार छोटी-छोटी रकम देने की अपील कर रहे थे। उनका कहना था कि किसी एक व्यक्ति का दिया हुआ एक रुपया भी महत्वपूर्ण है। जब बड़ी संख्या में लोग सहयोग करते हैं तो छोटी-छोटी रकम मिलकर एक बड़ी सहायता राशि बन जाती है।

महाबोधि मंदिर के बाहर इस मुहिम में सिर्फ पर्यटक ही नहीं, बल्कि स्थानीय लोग भी आगे आते दिखाई दिए। यहां तक कि वहां मंदिर के बाहर रहे स्थानीय भिखारियों ने भी अपनी क्षमता के अनुसार बम्बू बैंक में पैसे डाल नेपाल के बाढ़ पीड़ितों के प्रति संवेदना जताई। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए खासा भावुक करने वाला रहा।

71 की उम्र, पीठ पर 30 किलो वजन और हाथ में ढोलक, इंदौर से पैदल चलकर गया पहुंचे लक्ष्मण, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

गया मे उम्र 71 साल, पीठ पर करीब 30 किलो का सामान और हाथ में ढोलक। नंगे पैर रोज 30-35 किलोमीटर पैदल चलकर मध्यप्रदेश के इंदौर से गया पहुंचे लक्ष्मण नामदेव गंवीर चर्चा का विषय बना हैं। करीब 26 महीने से ज्यादा समय तक पैदल यात्रा करने के बाद वह गया पहुंचे और विधि-विधान से पिंडदान किया।

लक्ष्मण ने गया तक की यात्रा करीब 4 हजार किलोमीटर रही। पिंडदान के बाद भी उनका सफर खत्म नहीं हुआ है। वह करीब 2 हजार किलोमीटर की पैदल यात्रा कर वापस इंदौर लौटने की तैयारी में हैं।
हादसा देखा और बना लिया गया आने का संकल्प
लक्ष्मण बताते हैं कि 6 जुलाई 2024 को उन्होंने एक दुर्घटना देखी। घटना ने उन्हें इतना विचलित किया कि उन्होंने तय किया कि गया जाकर सिर्फ अपने पितरों का ही नहीं, बल्कि दुर्घटना, आपदा ,त्रासदी और अन्य कारणों से असमय जान गंवाने वाले लोगों की आत्मा की शांति के लिए भी पिंडदान करेंगे।

उन्होंने शहीद जवानों, कोरोना काल में मृत लोगों, अहमदाबाद विमान हादसा , नेपाल त्रासदी, पुलवामा हमला में शहीद के मृतकों और विभिन्न दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों के लिए भी पिंडदान किया।

लक्ष्मण पेशे से ढोलक और घुंघरू वादक हैं। इसलिए यात्रा में भी उन्होंने अपनी कला नहीं छोड़ी। वह ढोलक बजाते हुए चलते है साथ महापुरुषों की तस्वीरों वाला फ्रेम और तिरंगा भी रहता है। कठिन रास्ते से चलकर गया पहुंचकर पिंडदान किया।उसके बाद बोधगया पहुंचे है।जहां महाबोधी मंदिर के गर्भगृह में विशेष पूजा अर्चना कर आगे इंदौर की यात्रा पर निकल पड़े है।

जेब खाली हो तो भी इलाज नहीं रुकेगा! बोधगया में हर शुक्रवार गरीबों के लिए ‘मुफ्त डॉक्टर और दवा’ की सुविधा

इलाज के लिए पैसे की कमी गरीब और बेसहारा लोगों के सामने बड़ी परेशानी बन जाती है। ऐसे लोगों के लिए बोधगया में जीवक फाउंडेशन की ओर से पिछले कई वर्षों से निःशुल्क चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराई जा रही है। यहां मरीजों को डॉक्टर से परामर्श के साथ-साथ जरूरत के अनुसार होम्योपैथी और एलोपैथी की दवाएं भी मुफ्त दी जाती हैं।

फाउंडेशन की इस पहल का लाभ केवल बोधगया प्रखंड के लोगों को ही नहीं, बल्कि जिले के सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाकों से आने वाले जरूरतमंद मरीजों को भी मिल रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह सेवा काफी मददगार साबित हो रही है। कई ऐसे लोग भी यहां पहुंचते हैं, जिनके लिए निजी अस्पताल में इलाज और दवा का खर्च उठाना मुश्किल होता है।

जीवक फाउंडेशन में प्रत्येक शुक्रवार को डॉक्टर मरीजों की जांच और इलाज करते हैं। जांच के बाद मरीजों को आवश्यक चिकित्सकीय सलाह दी जाती है और जरूरत के मुताबिक निःशुल्क दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। होम्योपैथी और एलोपैथी दोनों तरह की दवाएं मिलने से अलग-अलग जरूरत वाले मरीजों को सुविधा मिल रही है।
लगातार कई वर्षों से संचालित यह सेवा ग्रामीण और जरूरतमंद लोगों के लिए स्वास्थ्य सुविधा का एक सहारा बनी हुई है। खासकर उन परिवारों को इससे राहत मिल रही है, जो आर्थिक परेशानी के कारण समय पर इलाज नहीं करा पाते।

नेपाल त्रासदी के मृतकों की आत्मशांति को लेकर बोधगया मठ में जले हजारों दीप, विदेशी श्रद्धालुओं ने की विशेष प्रार्थना

नेपाल में हुई त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों की आत्मशांति के लिए बोधगया मठ परिसर में सोमवार को विशेष प्रार्थना और धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया।जिसमे ताइवान, थाईलैंड और जापान से पहुंचे विदेशी श्रद्धालुओं के द्वारा हजारों दीप प्रज्वलित कर मृतकों को श्रद्धांजलि दी और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
मठ परिसर में विद्वानों के नेतृत्व में वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच विधिवत हवन किया गया। इस दौरान वातावरण मंत्रोच्चारण और प्रार्थना से आध्यात्मिक हो उठा। विशेष पूजा में विभिन्न देशों से आए बौद्ध भिक्षुओं के साथ सनातन धर्म के संत और बड़ी संख्या में विदेशी श्रद्धालु शामिल हुए।
श्रद्धालुओं ने दीप जलाकर नेपाल त्रासदी में मारे गए लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने पीड़ित परिवारों को इस कठिन समय में धैर्य और शक्ति मिलने की कामना की। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान बौद्ध और सनातन परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला।

4000 दीपों से जगमगाया बोधगया का मठ परिसर, ताइवान, थाईलैंड,जापान के श्रद्धालुओं ने किया वैदिक हवन-पूजन

बोधगया के प्राचीन मठ परिसर में गुरुवार को बौद्ध और सनातन परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला। ताइवान, थाईलैंड और जापान से आए श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए विशेष धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया। इस दौरान ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच विधिवत हवन और पूजन कराया।

अनुष्ठान में बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षुओं ने भी हिस्सा लिया। श्रद्धालुओं और भिक्षुओं ने धार्मिक अनुष्ठान में श्रद्धा के साथ भाग लेते हुए पूर्वजों की शांति, सुख-समृद्धि और विश्व शांति की कामना की। आयोजन के दौरान वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ ध्यान और प्रार्थना का क्रम भी चलता रहा।इस दौरान बौद्ध धर्म के भिक्षुओं के द्वारा अपनी भाषा में तो वहीं सनातन धर्म के अनुसार भी मंत्रों का एक साथ उच्चारण किया गया।
ताइवान से आए श्रद्धालु बौद्ध धर्म की मान्यताओं के साथ सनातन परंपरा के वैदिक अनुष्ठानों को जोड़कर यह आयोजन कर रहे थे।

मठ परिसर में 4000 दीप प्रज्वलित किए गए। हजारों दीपों की रोशनी और मंत्रोच्चारण से पूरा परिसर आध्यात्मिक वातावरण में डूब गया। बोधगया की धरती पर आयोजित यह कार्यक्रम धार्मिक परंपराओं के बीच आस्था, सम्मान और सांस्कृतिक समन्वय का अनोखा उदाहरण बना।

बोधगया के बौद्ध मठों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, भिक्षुओं के खिलाफ केस खारिज

पटना हाईकोर्ट ने बोधगया के विभिन्न बौद्ध मंदिरों और मठों के प्रभारी भिक्षुओं के खिलाफ दायर मामलों को खारिज कर दिया। कोर्ट रूम नंबर-11 में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई की। बोधगया होटल एसोसिएशन के सचिव सुदामा कुमार की ओर से मठों और भिक्षु प्रभारियों के खिलाफ मामले दायर किए गए थे।
बोधगया मठ संघ के अध्यक्ष भिक्षु प्रियपाल ने बताया कि बुधवार को सुनवाई के दौरान उन्हें और अन्य बौद्ध भिक्षुओं को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। न्यायालय ने उनकी बातों को ध्यानपूर्वक सुना। वहीं, सुनवाई के दौरान बोधगया होटल एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता ने मठों और मंदिरों के प्रभारियों पर कई गंभीर आरोप लगाए।

बोधगया होटल एसोसिएशन ने वर्ष 2017 में पटना हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि बोधगया के कई बौद्ध मठों में बिना स्वीकृत नक्शे के भवन निर्माण कर गेस्ट हाउस, दुकान और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। एसोसिएशन का दावा था कि ऐसी गतिविधियों से स्थानीय होटल कारोबार प्रभावित हो रहा है। हाईकोर्ट के ताजा आदेश से मामले में मठ प्रबंधन से जुड़े पक्षों को राहत मिली है।

नेपाल की भीषण आपदा के बाद बोधगया पहुंचे पर्यटकों में डर, बोले—भगवान बुद्ध से प्रार्थना है, फिर कभी न आए ऐसी तबाही

नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली बोधगया पहुंचे नेपाली पर्यटकों में अपने देश और वहां रह रहे परिवारों को लेकर गहरी चिंता बनी हुई है। बोधगया घूमने पहुंचे पर्यटकों ने नेपाल में हुई तबाही को बेहद दर्दनाक बताते हुए कहा कि उनके मन में अभी भी डर बना हुआ है कि पहाड़ी क्षेत्रों में कब क्या हो जाए, कोई नहीं कह सकता है। पर्यटकों ने भगवान बुद्ध से नेपाल की सुख-शांति और लोगों की सुरक्षा के लिए प्रार्थना की।

नेपाल के विराटनगर से बोधगया पहुंचे पर्यटक शिव नारायण ने बुधवार को बताया कि 26 अगस्त की सुबह नेपाल के कई इलाकों में अचानक आई तेज बाढ़ ने भारी तबाही मचाई।बताया कि उस समय अधिकांश लोग अपने घरों में थे, कुछ लोग भोजन कर रहे थे तो कई लोग कार्यालय जाने की तैयारी में थे। अचानक आई बाढ़ से भारी जान-माल की क्षति हुई। आपदा का मंजर बेहद भयावह था और इसे देखकर हर कोई स्तब्ध रह गया।

नेपाली पर्यटक ने बताया कि बाढ़ ने कई इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि उनके परिवार का बोधगया आने का कार्यक्रम आपदा से पहले ही तय था, इसलिए वे लोग भगवान बुद्ध के दर्शन के लिए यहां पहुंचे हैं। लेकिन नेपाल में हुई तबाही के बाद भी उनके मन में लगातार भय बना हुआ है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और प्राकृतिक परिस्थितियों को लेकर लोगों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना है।

पर्यटक ने भारत द्वारा नेपाल को दी जा रही सहायता का भी जिक्र करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में मानवीय मदद बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि नेपाल सरकार भी आपदा से निपटने के लिए सहयोग का स्वागत कर रही है।

महिला पर्यटक ने नेपाल में हुई घटना को बेहद दुखद बताया। उन्होंने कहा कि नेपाल के लोगों की सुरक्षा और आपदा से राहत के लिए वे भगवान बुद्ध से प्रार्थना कर रही हैं। महिला पर्यटक ने आशंका जताई कि प्राकृतिक परिस्थितियों को देखते हुए लोगों के बीच आगे भी बाढ़ का डर बना हुआ है।

बोधगया की सड़कों और पर्यटन स्थलों पर घूमते नेपाली पर्यटक भले ही भगवान बुद्ध के दर्शन के लिए पहुंचे हैं, लेकिन उनके चेहरों पर अपने देश में आई आपदा की चिंता साफ दिखाई दे रही है। सभी ने एक स्वर में प्रार्थना की कि नेपाल को जल्द इस संकट से राहत मिले और भविष्य में ऐसी विनाशकारी आपदा दोबारा न आए।

बोधगया के प्राचीन काली मंदिर में गूंजेगा ‘जय कन्हैया लाल की’, जन्माष्टमी पर उमड़ेगा आस्था का सैलाब

बोधगया के प्राचीन काली मंदिर परिसर में आगामी 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव श्रद्धा और भक्ति के माहौल में मनाया जाएगा। आयोजन को लेकर आनंद वन काली मंदिर समिति के द्वारा तैयारी को लेकर बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें आयोजन को भव्य और सफल बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में उपस्थित समिति सदस्यों ने बताया कि जन्माष्टमी के दिन विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
बताया कि 5 सितंबर को राधा-कृष्ण की आकर्षक झांकी यात्रा निकाली जाएगी। इसके साथ ही श्रद्धालुओं के लिए भव्य भंडारे का आयोजन किया जाएगा तथा रात में भक्ति कार्यक्रमों के बीच रात्रि जागरण होगा। आयोजन समिति ने बताया कि झांकी और धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर विशेष तैयारी की जा रही है।
जन्माष्टमी उत्सव में बोधगया और आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा, पूजा व्यवस्था और अन्य आवश्यक तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। समिति सदस्यों ने कहा कि इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव को भव्य और यादगार बनाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारी की जा रही है।

बोधगया के पर्यटन विकास का बनेगा नया रोडमैप, लेजर शो से एयर कनेक्टिविटी तक पर मंथन

संसदीय पर्यटन एवं संस्कृति संबंधी स्थायी समिति के सदस्यों ने बोधगया का दौरा कर स्थानीय पर्यटन व्यवसायियों और हितधारकों के साथ संवाद किया। बैठक में बोधगया को विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने, पर्यटकों की सुविधाओं का विस्तार करने और आधारभूत संरचना को मजबूत बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई। समिति के अध्यक्ष संजय कुमार झा एवं सांसद राजीव प्रताप रुडी को विभिन्न स्थानीय एसोसिएशनों की ओर से मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।
बैठक में धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय पर्यटन व्यवसाय और रोजगार के अवसर बढ़ाने को लेकर सुझाव लिए गए। हितधारकों ने बोधगया में भगवान बुद्ध के जीवन पर आधारित लेजर शो शुरू करने का प्रस्ताव रखा। इसके अलावा गया एयरपोर्ट का विकास व्यापारिक दृष्टिकोण से करने तथा मुंबई, चेन्नई और पूर्वोत्तर राज्यों के साथ हवाई कनेक्टिविटी बेहतर करने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।

स्थानीय प्रतिनिधियों ने कहा कि महाबोधि मंदिर आने वाले पर्यटकों को आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से जोड़ने की जरूरत है। इसके लिए महाबोधि मंदिर के करीब पांच किलोमीटर के दायरे में स्थित गांवों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने का सुझाव दिया गया। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।


बैठक में रणविजय सिंह, राहुल केशव, रंजन कुमार, मृत्युंजय राय, राजीव रंजन और अरुण रजा सहित पर्यटन क्षेत्र से जुड़े कई प्रतिनिधि एवं हितधारक मौजूद रहे। प्रतिनिधियों ने केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से बोधगया के पर्यटन विकास को गति देने तथा सुविधाओं के विस्तार के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया।

बिहार पर्यटन को देशभर में नई पहचान दिलाने की पहल, 50 ट्रैवल पार्टनर्स ने जाना गया-बोधगया का आध्यात्मिक वैभव

बिहार में पर्यटन को बढ़ावा देने एवं देशभर के ट्रैवल पार्टनर्स को बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत से परिचित कराने के उद्देश्य से ABTO (Association of Buddhist Tour Operators) द्वारा बिहार सरकार के पर्यटन विभाग के सहयोग से 18 से 20 अगस्त 2026 तक तीन दिवसीय FAM Trip का सफल आयोजन किया गया।

इस FAM Trip में भारत के विभिन्न राज्यों से आए करीब 50 टूर ऑपरेटर्स एवं ट्रैवल पार्टनर्स ने भाग लिया। प्रतिभागियों को बोधगया, गया, राजगीर और नालंदा के प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों का भ्रमण कराया गया तथा बिहार के पर्यटन की संभावनाओं से अवगत कराया गया।

कार्यक्रम का विशेष उद्देश्य आगामी पितृपक्ष मेला को सफल बनाने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से आए ट्रैवल पार्टनर्स को गया-बोधगया की धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्ता, पर्यटन सुविधाओं और स्थानीय पर्यटन स्थलों की जानकारी देना था।

कार्यक्रम को सफल बनाने में ABTO के General Secretary  कौलेश कुमार , कार्यक्रम संयोजक रामजी शर्मा, सुदामा प्रसाद , मनीष मिश्रा , अरुण राजा , राहुल कश्यप , मृत्युंजय कुमार , सहेंद्र जी , वैभव जी , धीरज जी एवं ABTO बिहार के सदस्यों एवं बिहार के सभी सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सभी सदस्यों ने अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए पूरे कार्यक्रम में सक्रिय सहयोग दिया।

इसके अलावा बिहार पर्यटन विभाग, बोधगया के श्री मनमोहन जी, बोधगया के 10 से अधिक होटल एवं करीब 15 ट्रैवल पार्टनर्स ने भी आयोजन में सक्रिय सहयोग प्रदान किया।

ABTO के पदाधिकारियों ने कहा कि इस तरह के FAM Trip के माध्यम से देशभर के ट्रैवल एजेंट एवं टूर ऑपरेटर्स को बिहार के पर्यटन स्थलों की वास्तविक जानकारी मिलती है, जिससे आने वाले समय में बिहार में घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी।

तीन दिवसीय इस आयोजन ने न केवल ट्रैवल इंडस्ट्री के लोगों को एक-दूसरे से जुड़ने का अवसर दिया, बल्कि बिहार पर्यटन को राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत तरीके से प्रस्तुत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुआ।