Breaking News
पितृपक्ष मेले से पहले प्रशासन का बड़ा एक्शन प्लान, 21 कोषांग गठित; जानिए क्या-क्या होगा..?

पितृपक्ष मेला-2026 को सुरक्षित, स्वच्छ और श्रद्धालु-अनुकूल बनाने के लिए गया जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले मेले के सफल संचालन को लेकर 21 कोषांगों का गठन किया गया है। प्रत्येक कोषांग में वरीय नोडल पदाधिकारी, नोडल पदाधिकारी और सदस्यों की नियुक्ति कर समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया गया है।
जिला परिषद सभागार में आयोजित पहली समीक्षा बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने की। बैठक में समाजसेवियों, पंडा-पुरोहितों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों से सुझाव लिए गए। डीएम ने कहा कि पिछले वर्ष की तरह इस बार भी मेले को और बेहतर बनाया जाएगा। उन्होंने जिलेवासियों से भी सुझाव आमंत्रित करते हुए ppmhasangam@gmail.com पर अपने सुझाव भेजने की अपील की।

प्रशासन ने आवास, स्वच्छता, पेयजल, स्वास्थ्य, बिजली, सड़क, यातायात, सुरक्षा, सूचना प्रबंधन और आपदा प्रबंधन पर विशेष जोर दिया है। होटल, धर्मशाला, विद्यालयों सहित अन्य भवनों में आवास की व्यवस्था की जाएगी, वहीं जरूरत पड़ने पर टेंट सिटी भी विकसित होगी। हर 200 से 500 मीटर पर पेयजल, पर्याप्त शौचालय और नियमित सफाई सुनिश्चित की जाएगी।

विष्णुपद मंदिर और प्रमुख घाटों पर 24 घंटे स्वास्थ्य शिविर, एम्बुलेंस और चिकित्सकों की तैनाती रहेगी। पूरे मेला क्षेत्र में सीसीटीवी निगरानी, अस्थायी पुलिस शिविर और व्यापक ट्रैफिक प्लान लागू होगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए वेबसाइट, मोबाइल ऐप, हेल्प डेस्क, खोया-पाया केंद्र और 24×7 कॉल सेंटर भी संचालित किए जाएंगे।
जिलाधिकारी ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि निर्धारित समय सीमा में सभी तैयारियां पूरी कर पितृपक्ष मेला-2026 को श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित, सुव्यवस्थित और यादगार बनाया जाए।

दिल छू लेने वाली कहानी; 25 साल तक भीख मांगकर गुजारा, अपनों ने छोड़ा तो वेदा बनी सहारा

कहते हैं कि इंसानियत आज भी जिंदा है, और इसका एक मार्मिक उदाहरण बोधगया में देखने को मिला। पिछले करीब 25 वर्षों से शहर के बाजारों में भीख मांगकर जीवन यापन करने वाली एक वृद्ध महिला को आखिरकार सुरक्षित आश्रय मिल गया। उम्र और बीमारी के कारण जब उनका शरीर जवाब देने लगा तो अपने भी उनसे दूर हो गए। वह सड़क किनारे लावारिस और असहाय अवस्था में पड़ी मिलीं।
इसकी सूचना मिलने पर वेदा ओल्ड एज होम की संचालिका वेदा अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचीं और वृद्ध महिला को अपने संरक्षण में लिया। महिला की तबीयत खराब होने के कारण पहले उनका चिकित्सकीय उपचार कराया जाएगा, इसके बाद उन्हें ओल्ड एज होम में रखा जाएगा, जहां उनके भोजन, इलाज और देखभाल की पूरी व्यवस्था की जाएगी।
वेदा ने बताया कि उनका संस्थान पिछले लगभग 20 वर्षों से गया जिले में बेसहारा, अनाथ और उपेक्षित वृद्ध महिला-पुरुषों की सेवा कर रहा है। बोधगया वर्तमान में ओल्ड एज होम में 23 वृद्धजन रह रहे हैं, जिनकी भोजन, दवा और अन्य आवश्यक जरूरतों का नियमित रूप से ध्यान रखा जाता है।

उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे कई बुजुर्ग हैं, जिन्हें परिवार का साथ नहीं मिल पाता और वे मजबूरी में सड़क पर जीवन बिताने को विवश हो जाते हैं। ऐसे लोगों को सम्मानजनक जीवन देना ही संस्था का उद्देश्य है। उन्होंने समाज के लोगों को यह संदेश दिया कि अपने बुजुर्ग परिवार की देखभाल करने की अपील की है।कई ऐसे परिजन है जिन्होंने अपने वृद्ध मां पिया को घर से निकाल दिया है।जिन्हें ओल्ड एज होम का सहारा लेना पड़ रहा है।

बोधगया की इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जब अपने साथ छोड़ देते हैं, तब भी संवेदनशील लोग और सामाजिक संस्थाएं किसी की जिंदगी में उम्मीद की नई किरण बन सकती हैं।

oplus_0
बोधगया में मॉनेस्ट्री की छत से गिरा बौद्ध भिक्षु, जीवक क्लीनिक की एम्बुलेंस ने दिखाई तत्परता

बोधगया स्थित वट पा बौद्ध मॉनेस्ट्री में मंगलवार की देर रात एक बौद्ध भिक्षु के साथ बड़ा हादसा हो गया। जानकारी के अनुसार, भिक्षु रात में मॉनेस्ट्री की छत पर सो रहे थे। इसी दौरान अचानक संतुलन बिगड़ने से वह छत से नीचे गिर पड़े, जिसमें उन्हें गंभीर रूप से घायल हो गया है।
घटना के बाद मॉनेस्ट्री के सदस्यों ने बोधगया के जीवक क्लीनिक को सूचना दी। सूचना मिलते ही जीवक क्लीनिक की अत्याधुनिक एम्बुलेंस मौके पर पहुंची और गंभीर रूप से घायल भिक्षु को प्राथमिक सहायता देते हुए बेहतर इलाज के लिए गया ले जाया गया। फिलहाल उनका इलाज गया के एक निजी अस्पताल में चल रहा है।

जीवक क्लीनिक द्वारा लंबे समय से बोधगया में निःशुल्क होमियोपैथी क्लीनिक का संचालन किया जा रहा है। यहां गया जिले के सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। इसके साथ ही क्लीनिक की अत्याधुनिक एम्बुलेंस आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों के लिए जीवन रक्षक साबित हो रही है और समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

देव स्नान के बाद 15 दिनों के लिए बंद हुआ श्री जगन्नाथ मंदिर का पट, 16 जुलाई को निकलेगी भव्य रथयात्रा

प्राचीन श्री जगन्नाथ मंदिर न्यास समिति, बोधगया द्वारा आयोजित भगवान श्री जगन्नाथ के वार्षिक उत्सव की शुरुआत देव स्नान पर्व के साथ हो गई। प्रेस वार्ता में न्यास समिति के सचिव राय मदन किशोर ने बताया कि प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी धार्मिक परंपराओं के अनुसार कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि देव स्नान के अवसर पर भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का विशेष स्नान, पूजन एवं भोग अर्पण किया गया। इसके बाद भगवान को पुनः गर्भगृह में स्थापित कर दिया गया है। अब अगले 15 दिनों तक मंदिर का पट आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए बंद रहेगा। इस अवधि को भगवान का “अनसर” अथवा “रुग्णावकाश” काल माना जाता है, जिसमें मान्यता के अनुसार देव स्नान के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं।
राय मदन किशोर ने बताया कि 14 जुलाई को मंदिर का पट पुनः खोला जाएगा। इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना के साथ भगवान को 56 भोग अर्पित किया जाएगा तथा श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन भी होगा। 15 जुलाई को भजन संध्या एवं धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। वहीं 16 जुलाई को भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों तथा आम श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया जाएगा। 17 जुलाई की सुबह रथ वापसी (बहुदा यात्रा) संपन्न होगी, जिसके बाद भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
इस अवसर पर गया कॉलेज के अंग्रेजी विभाग के प्राध्यापक टी. के. नारायण ने रथयात्रा और भक्ति आंदोलन के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भक्ति आंदोलन का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों, विशेषकर वंचित समुदायों को धार्मिक गतिविधियों में समान भागीदारी दिलाना था। रथयात्रा इसी समावेशी परंपरा का प्रतीक है, जिसमें सभी लोग मिलकर भगवान के रथ को खींचते हैं।
उन्होंने बताया कि मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ जनमानस के दुख-दर्द को अपने ऊपर ले लेते हैं, इसलिए देव स्नान के बाद वे 15 दिनों तक विश्राम करते हैं। इस दौरान पुजारी उन्हें औषधीय जड़ी-बूटियों से बने काढ़े एवं विशेष पौष्टिक भोग अर्पित करते हैं। स्वस्थ होने के बाद भगवान पुनः भक्तों को दर्शन देते हैं और समाज के कल्याण का संदेश प्रदान करते हैं।

रिपोर्ट:- सुदीप्तो नाग

महाबोधी महाविहार मुक्ति आंदोलन के 501 दिन पूरे, बीटी एक्ट 1949 हटाने को लेकर देशभर के बौद्ध अनुयायी बोधगया में जुटे

बोधगया में महाबोधी महाविहार मुक्ति राष्ट्रीय आंदोलन समिति के बैनर तले महाबोधी महाविहार मुक्ति आंदोलन के 501वें दिन बोधगया में तीन दिवसीय बैठक एक निजी होटल में आयोजित की गई। बैठक में देश के विभिन्न राज्यों से आए बौद्ध अनुयायियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान महाबोधी महाविहार के प्रबंधन को पूरी तरह बौद्ध समुदाय को सौंपने तथा बीटी एक्ट 1949 (बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949) को रद्द करने की मांग को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि महाबोधी महाविहार बौद्ध धर्म का सबसे पवित्र तीर्थस्थल है, इसलिए इसका प्रबंधन का अधिकार बौद्ध समाज के पास होना चाहिए। इसी मांग को लेकर पिछले कई महीनों से शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी है और अब यह 501वें दिन में प्रवेश कर चुका है।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे आकाश लामा ने बताया कि आंदोलन को देशभर के बौद्ध समाज का लगातार समर्थन मिल रहा है। बैठक में आगे की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा तथा निर्णय लिया जाएगा। आंदोलन को और व्यापक स्तर पर चलाया जाएगा। बैठक के बाद प्रधानमंत्री, बिहार के मुख्यमंत्री तथा राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर महाबोधी महाविहार से जुड़े मुद्दों पर ध्यान आकृष्ट कराया जाएगा । बीटी एक्ट 1949 को निरस्त करने और महाबोधी मंदिर का प्रबंधन बौद्ध समुदाय को सौंपने की मांग दोहराई गई है।

बैठक में उपस्थित प्रतिनिधियों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहेगा।केंद्र और राज्य सरकार से इस विषय पर शीघ्र पहल करते हुए बौद्ध समाज की भावनाओं का सम्मान करने की अपील की।

गया में किन्नर समाज ने बैठाया ताजिया, गंगा-जमुनी तहजीब की पेश की अनूठी मिसाल

मुहर्रम के अवसर पर शहर के रामशिला में किन्नर समाज ने सदियों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन करते हुए ताजिया बैठाया। किन्नर समाज द्वारा पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ ताजिया स्थापित किया गया। इस अवसर पर अखिल भारतीय किन्नर सदाबहार विकास समिति के सचिव सुरेश किन्नर उर्फ सुरेश हिजड़ा ने बताया कि उनका समाज पिछले कई वर्षों से मुहर्रम के अवसर पर ताजिया बैठाकर रस्मों का निर्वहन करते आ रहे है।

किन्नर समाज हमेशा से सर्वधर्म समभाव की भावना में विश्वास रखता है। जिस उत्साह और श्रद्धा के साथ समाज हिंदू धर्म के सभी प्रमुख पर्व-त्योहारों को मनाता है, उसी तरह इस्लाम धर्म के पवित्र अवसरों और शहादत के दिनों को भी पूरे सम्मान के साथ याद करता है। उन्होंने कहा कि कर्बला के शहीदों का बलिदान पूरी मानवता के लिए सत्य, न्याय और इंसानियत का संदेश देता है।
मुहर्रम के मौके पर सामाजिक सौहार्द, भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब की जीवंत मिसाल पेश करती है।बिना किसी भेदभाव के लोगों को एकता और आपसी सम्मान का संदेश देती है।

BT एक्ट 1949 रद्द करने की मांग को लेकर बौद्ध भिक्षुओं ने किया भूख हड़ताल, आंदोलन के 500 दिन हुआ पूरा

विश्व प्रसिद्ध महाबोधि महाविहार को महाबोधि मंदिर के प्रबंधन से जुड़े बोधगया टेंपल एक्ट (बीटी एक्ट) 1949 को समाप्त कर महाविहार का पूर्ण नियंत्रण बौद्ध समाज को सौंपने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन शुक्रवार को 500वां दिन पूरा हो गया है। इस मौके पर बीटीएमसी गोलंबर पर बौद्ध भिक्षुओं ने एकदिवसीय भूख हड़ताल किया है।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे आकाश लामा ने कहा कि जिस प्रकार मंदिरों का प्रबंधन हिंदू, मस्जिदों का मुस्लिम और चर्चों का ईसाई समुदाय करता है, उसी प्रकार महाबोधि महाविहार का प्रबंधन भी पूरी तरह बौद्ध समाज को सौंपा जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान बीटी एक्ट 1949 के तहत गठित प्रबंधन समिति में बौद्धों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है और यह अधिनियम असंवैधानिक है। इसे निरस्त कर महाविहार का संचालन पूर्ण रूप से बौद्ध समुदाय को दिया जाए। बताया कि यह आंदोलन 12 फरवरी 2025 से लगातार जारी है।वर्ष 2012 में इस मामले को लेकर न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया गया था, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकल सका।
भूख हड़ताल में देश के विभिन्न राज्यों से आए बौद्ध भिक्षुओं और अनुयायियों ने भाग लिया। वहीं पूरे विश्व में आज भूख हड़ताल किया गया है। मुहर्रम को देखते हुए प्रशासन ने भूख हड़ताल की अनुमति नहीं दी थी, जिसके बाद प्रशासन ने धरनास्थल से भिक्षुओं को हटा दिया। इसके बावजूद आंदोलन जारी रखने की बात कही है कहा कि संघर्ष जारी रहेगा।

बोधगया में गूंजेगा भक्ति का स्वर, 1 जुलाई से शुरू होगा 8 दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ

बोधगया प्रखंड के टीकाबीघा स्थित मौसा मोड़ के समीप पंचमुखी हनुमान मंदिर समिति के तत्वावधान में 1 जुलाई से 8 जुलाई तक श्री शनि देव मंदिर, राम दरबार मंदिर एवं शिवलिंग संत नरहरी दास के प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ का भव्य आयोजन किया जाएगा। धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व के इस आयोजन को लेकर क्षेत्र के श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है।
महायज्ञ के यज्ञाचार्य मंत्रालय रामाचार्य वैदिक पाठशाला, विष्णुपद मार्ग, गयाजी होंगे, जबकि वृंदावन की पूज्य साध्वी डॉ. प्रज्ञा भारती प्रतिदिन श्रीमद्भागवत कथा का वाचन करेंगी।
कार्यक्रम की शुरुआत 1 जुलाई को भव्य कलश यात्रा के साथ होगी। 2 जुलाई को मंडप प्रवेश एवं अग्नि प्रकट, 3 जुलाई को वैदिक पाठ आरंभ, 4 जुलाई को प्रतिष्ठान कर्मकांड, 5 जुलाई को हवन, 6 जुलाई को जलाधिवास एवं नगर भ्रमण तथा 7 जुलाई को भगवान की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न होगी। 8 जुलाई को शिव चर्चा, महाभंडारा एवं महाप्रसाद वितरण के साथ महायज्ञ का समापन किया जाएगा।

समिति के अनुसार 1 से 7 जुलाई तक प्रतिदिन शाम 4 बजे से 7 बजे तक श्रीमद्भागवत कथा एवं शाम 7 बजे से 9 बजे तक रामलीला का मंचन होगा। श्रद्धालुओं और बच्चों के मनोरंजन के लिए डिज्नीलैंड मेले की भी विशेष व्यवस्था की गई है।
आयोजन समिति ने जिले एवं आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर धर्म लाभ प्राप्त करने की अपील की है।

रिपोर्ट:- सुदीप्तो नाग

नाम भी, जिम्मेदारी भी: गया की मंथन वाटिका में हर पौधे के साथ जुड़ा IAS अधिकारी का नाम

गया शहर के ब्रह्मयोनि पहाड़ के नीचे स्थित बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (बिपार्ड) परिसर में विकसित ‘मंथन वाटिका’ इन दिनों लोगों के आकर्षण का केंद्र बना है। इस वाटिका की सबसे खास बात यह है कि यहां लगाए गए प्रत्येक पौधे के साथ किसी न किसी आईएएस अधिकारी का नेम प्लेट लगा हुआ है। बंजर पड़ी जमीन पर विकसित की गई यह वाटिका अब हरियाली और पर्यावरण संरक्षण की अनोखी पहचान बन गई है।
वाटिका में करीब 200 से अधिक पौधे लगाए गए हैं। इन पौधों पर बिहार के विभिन्न जिलों के जिलाधिकारी, आयुक्त, सचिव समेत कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के नाम अंकित हैं। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारियों की सामाजिक जिम्मेदारी और जनभागीदारी का भी संदेश दे रही है।
दिसंबर 2025 में गया स्थित बिपार्ड में बिहार सरकार द्वारा सभी आईएएस अधिकारियों के लिए एक विशेष ‘मंथन कार्यक्रम’ आयोजित किया गया था। इस दौरान राज्य के विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी व्यापक चर्चा हुई थी। चर्चा के बाद ब्रह्मयोनि पहाड़ के नीचे स्थित बंजर भूमि पर सामूहिक वृक्षारोपण अभियान चलाया गया, जिसमें सभी अधिकारियों ने अपने नाम का एक-एक पौधा लगाया और उसके पास अपना नेम प्लेट भी स्थापित किया।
इस पहल का उद्देश्य केवल हरियाली बढ़ाना नहीं, बल्कि आम लोगों को भी वृक्षारोपण के लिए प्रेरित करना था। आज यह मंथन वाटिका पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का एक जीवंत उदाहरण बनकर उभरी है।
मंथन वाटिका देखने पहुंचे स्थानीय निवासी सुशांत कुमार ने कहा कि यह पहल बेहद सराहनीय है। उन्होंने बताया कि तेजी से घटते वन क्षेत्र और बढ़ते तापमान के बीच इस तरह का वृक्षारोपण पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। आने वाले वर्षों में ये पौधे बड़े होकर लोगों को छाया, स्वच्छ हवा और बेहतर पर्यावरण प्रदान करेंगे। साथ ही अधिकारियों के नाम जुड़े होने से यह पहल लोगों को भी वृक्षारोपण के लिए प्रेरित करेगी।

वहीं गया नगर निगम के नगर आयुक्त अभिषेक पलासिया ने बताया कि मंथन कार्यक्रम के दौरान बिहार के विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई थी। इसी सोच के तहत सभी आईएएस अधिकारियों ने वृक्षारोपण कर समाज को यह संदेश देने का प्रयास किया कि विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।
उन्होंने कहा कि यदि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, पर्याप्त जल और बेहतर पर्यावरण देना है तो प्रत्येक व्यक्ति को वृक्षारोपण और जल संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी बनाना होगा। मंथन वाटिका इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास है।
आज यह मंथन वाटिका न सिर्फ हरियाली की नई पहचान बन चुकी है, बल्कि यह संदेश भी दे रही है कि जब प्रशासन और समाज साथ आएं तो बंजर जमीन भी पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बन सकती है।

धनावा पहुंचे राज्यसभा सांसद डॉ. भीम सिंह, कहा- जल्द लगेगी मगध सम्राट जरासंध की नई प्रतिमा

राज्यसभा सांसद डॉ. भीम सिंह ने रविवार को बोधगया प्रखंड के धनावा स्थित विखंडित मगध सम्राट जरासंध प्रतिमा स्थल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने मगध सम्राट जरासंध क्लब द्वारा होटल गीतांजलि बुद्ध रिजॉर्ट में समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया।
बैठक में सांसद डॉ. भीम सिंह ने कहा कि विखंडित प्रतिमा के स्थान पर नई प्रतिमा स्थापित करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा राज्य कैबिनेट को प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रतिमा स्थापना के लिए जल्द ही राज्य सरकार से बातचीत की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर प्रतिनिधंडल सीएम से भी मुलाकात करेगा।

उन्होंने कहा कि प्रतिमा स्थल के समीप एक चौपाल और सामुदायिक भवन का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए वे पहले ही 15 लाख रुपये की राशि उपलब्ध करा चुके हैं। सांसद ने बताया कि अपने सांसद निधि कोष से पूरे बिहार में लगभग 500 चौपाल बनाने की योजना है, जिसमें धनावा को भी शामिल किया गया है।
डॉ. भीम सिंह ने कहा कि मगध सम्राट जरासंध की प्रतिमा का मुद्दा समाज की अस्मिता से जुड़ा हुआ है और इस विषय पर सभी चंद्रवंशी समाज के लोगों एवं जनप्रतिनिधियों को एकजुट होकर प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार से भी चर्चा की जाएगी।
सांसद ने प्रतिमा विखंडित मामले की जांच पर कहा कि दोषियों की पहचान के लिए जिला पुलिस द्वारा एसआईटी का गठन किया गया था, लेकिन अब तक खुलासा नहीं हो सका है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।