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SC/ST सांसदों को संसद में कम मिलता है बोलने का समय,केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सांसदों को संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों पर अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा है। यह जानकारी मांझी ने शनिवार को गया के गोदावरी स्थित अपने आवास पर दी।

कहा कि एनडीए सांसद समूह संवाद बैठक में सांसदों ने यह समस्या उठाई थी। उन्होंने बताया कि बैठक में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होती है और संबंधित मंत्रालयों को कार्रवाई के लिए पत्र भेजे जाते हैं। इसी क्रम में SC-ST सांसदों को संसद में बोलने का कम समय मिलने की बात सामने आई, जिसके बाद उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा।
मांझी ने कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत शिकायत नहीं है, बल्कि बैठक में सांसदों की ओर से समस्या रखी गई थी। समूह के नेता होने के नाते उन्होंने इस विषय को आगे बढ़ाया है।

आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर मांझी ने SC आरक्षण में क्रीमी लेयर और वर्गीकरण की समीक्षा की अपनी मांग का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कैबिनेट की बैठक में भी अपनी बात रखी थी। मांझी के मुताबिक, प्रस्ताव पर सरकार ने आगे कार्रवाई नहीं की, लेकिन अपनी बात रखना उनका अधिकार और जिम्मेदारी थी।
उन्होंने कहा कि सरकार के फैसले सामूहिक उत्तरदायित्व के तहत होते हैं। कैबिनेट में अलग-अलग मत रखे जा सकते हैं, लेकिन निर्णय होने के बाद सरकार की सामूहिक जिम्मेदारी रहती है। उन्होंने इस मुद्दे पर इस्तीफे की मांग या राजनीति किए जाने को उचित नहीं बताया।