71 की उम्र, पीठ पर 30 किलो वजन और हाथ में ढोलक, इंदौर से पैदल चलकर गया पहुंचे लक्ष्मण, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान
गया मे उम्र 71 साल, पीठ पर करीब 30 किलो का सामान और हाथ में ढोलक। नंगे पैर रोज 30-35 किलोमीटर पैदल चलकर मध्यप्रदेश के इंदौर से गया पहुंचे लक्ष्मण नामदेव गंवीर चर्चा का विषय बना हैं। करीब 26 महीने से ज्यादा समय तक पैदल यात्रा करने के बाद वह गया पहुंचे और विधि-विधान से पिंडदान किया।
लक्ष्मण ने गया तक की यात्रा करीब 4 हजार किलोमीटर रही। पिंडदान के बाद भी उनका सफर खत्म नहीं हुआ है। वह करीब 2 हजार किलोमीटर की पैदल यात्रा कर वापस इंदौर लौटने की तैयारी में हैं।
हादसा देखा और बना लिया गया आने का संकल्प
लक्ष्मण बताते हैं कि 6 जुलाई 2024 को उन्होंने एक दुर्घटना देखी। घटना ने उन्हें इतना विचलित किया कि उन्होंने तय किया कि गया जाकर सिर्फ अपने पितरों का ही नहीं, बल्कि दुर्घटना, आपदा ,त्रासदी और अन्य कारणों से असमय जान गंवाने वाले लोगों की आत्मा की शांति के लिए भी पिंडदान करेंगे।
उन्होंने शहीद जवानों, कोरोना काल में मृत लोगों, अहमदाबाद विमान हादसा , नेपाल त्रासदी, पुलवामा हमला में शहीद के मृतकों और विभिन्न दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों के लिए भी पिंडदान किया।
लक्ष्मण पेशे से ढोलक और घुंघरू वादक हैं। इसलिए यात्रा में भी उन्होंने अपनी कला नहीं छोड़ी। वह ढोलक बजाते हुए चलते है साथ महापुरुषों की तस्वीरों वाला फ्रेम और तिरंगा भी रहता है। कठिन रास्ते से चलकर गया पहुंचकर पिंडदान किया।उसके बाद बोधगया पहुंचे है।जहां महाबोधी मंदिर के गर्भगृह में विशेष पूजा अर्चना कर आगे इंदौर की यात्रा पर निकल पड़े है।


